अनिल कुंबले यानि भारतीय क्रिकेट के ‘और’ अच्छे दिन

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Anil Kumble
Anil Kumble

दिग्गज रवि शास्त्री समेत 56 दावेदारों को मात देकर अनिल कुंबले के भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य कोच बनने पर भारत के सार्वकालिक महान क्रिकेटरों में एक सुनील गावस्कर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट के लिए अब अच्छे दिन आने वाले हैं। गलत नहीं कहा गावस्कर ने लेकिन उनके इस कथन में ‘और’ जोड़ना जरूरी होगा। भारतीय क्रिकेट के ‘अच्छे दिन’ तो हैं ही लेकिन कुंबले उसे ‘और अच्छा’ कर सकते हैं। देखा जाय तो आज भारतीय क्रिकेट विश्व क्रिकेट को ‘प्रभावित’ ही नहीं बल्कि ‘संचालित’ करने की स्थिति में है और ऐसे में कुंबले जैसे व्यक्ति की सख्त जरूरत थी। एक ओर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का अकूत पैसा तो दूसरी ओर धोनी, कोहली, अश्विन जैसे खिलाड़ी, कमी थी तो बस कुंबले जैसे मार्गदर्शक की जो व्यावसायिकता के दौर में भी अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से क्रिकेट का ‘मर्म’ बचा कर रख सके।

भारत की ओर से सर्वाधिक विकेट लेने और विकेट लेने के मामले में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मुथैया मुरलीधरन और शेन वार्न के बाद तीसरे स्थान पर काबिज कुंबले के पास ना केवल अनुभव का भंडार है बल्कि क्रिकेट के लिए वैसा जज्बा और जुनून है जो कम ही खिलाड़ियों में होता है। वेस्टइंडीज में जबड़ा टूट जाने के बाद भी गेंदबाजी करना और फिर भी ब्रायन लारा जैसे बल्लेबाज का विकेट लेना, ऐसा केवल कुंबले ही कर सकते थे।

कुंबले ने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। पाकिस्तान के खिलाफ फिरोजशाह कोटला में 74 रन देकर उनका 10 विकेट लेने का करिश्मा कौन भूल सकता है? मोहम्मद अजहरूद्दीन और सौरव गांगुली आज अगर भारत के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं तो इसका एक बहुत बड़ा कारण ये है कि उनकी टीम में कुंबले नाम का फिरकी का जादूगर था। वे हमेशा कुंबले के ऋणी रहेंगे कि उन्हें मैच जीतने के लिए स्पिनरों के अनुकूल पिचों की जरूरत नहीं पड़ती थी। विकेट के लिए कुंबले कभी पिच के मोहताज रहे ही नहीं।

अनिल कुंबले की गेंदें जितनी मारक रही हैं, स्वभाव से वे उतने ही मृदुल हैं। मैदान और मैदान के बाहर अपने अच्छे और सच्चे स्वभाव के कारण उन्हें क्रिकेट के जैंटलमैन का दर्जा हासिल है। 2008 में ऑस्ट्रेलिया में हुए विवाद के दौरान उनके व्यवहार की चर्चा आज भी आदर के साथ की जाती है। कुंबले के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सलाहकार समिति के तीनों सदस्य – सचिन तेन्दुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण – जानते थे कि कुंबले सिर से पैर तक ‘टीम मैन’ हैं। टीम को जोड़े रखने की कुंबले में कैसी क्षमता है, इन साथी खिलाड़ियों को ये किसी से पूछने की जरूरत नहीं थी। एक और बड़ी बात ये कि ना केवल सलाहकार समिति के ये तीनों सदस्य बल्कि टीम इंडिया के मौजूदा कई खिलाड़ी भी कुंबले के साथ खेले हुए हैं और उनके व्यक्तित्व के कायल हैं।

यह सही है कि कुंबले को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कोचिंग का अनुभव नहीं है लेकिन वे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और मुंबई इंडियन्स के मेंटर रहे हैं। अनुशासन प्रतिबद्धता और समर्पण में उनकी कोई सानी नहीं है। ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारतीय क्रिकेट की बल्लेबाजी में जो स्थान तेन्दुलकर रखते है, गेंदबाजी में वही स्थान कुंबले का है। ऐसे खिलाड़ी चले हुए रास्ते पर नहीं चलते बल्कि अपना रास्ता स्वयं बनाते हैं। एक बात और, कुंबले के पास इस स्तर पर कोचिंग का पूर्व अनुभव ना होने से लोग कुंबले के लिए और कुंबले स्वयं के लिए कोई पूर्वाग्रह नहीं रखेंगे और उन्हें खुलकर खेलने का भरपूर मौका मिलेगा। आप ही बताएं इससे अच्छी बात कुछ हो सकती है भला?

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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