फिल्म इंडस्ट्री में क्या सूख गई है संवेदना की नदी ?

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Salman Khan
Salman Khan

विवादों से फिल्म स्टार सलमान खान का सालों पुराना याराना रहा है। एक मामला ठंढ़ा होता नहीं है कि वो एक नया कांड कर डालते हैं। उनके अतीत पर गौर करें तो उनके द्वारा की हुई ऊटपटांग हरकतों की लिस्ट बहुत लंबी है। सलीम खान के ये साहबजादे सबसे पहले तब सुर्खियों में आये जब इनका नाम 1998 में राजस्थान में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दुर्लभ प्रजाति के हिरण चिंकारा का शिकार करने में आया। मामले में उन्हें एक साल की जेल की सजा हुई। लेकिन, बाद में इस सजा पर रोक लगा दी गई थी। 28 मार्च 2002 में मुंबई में सलमान खान ने अपनी कार से फुटपाथ पर सोये हुए कई लोगों को कुचल दिया। इस घटना में एक व्यक्ति मारा गया। जबकि कई लोग घायल हो गए थे। लेकिन, सलमान खान को हिट एंड रन जैसे इस गंभीर मामले में भी कोई सजा नहीं हुई। ऊंची रसूख अक्सर लोगों को सजा से बचा ले जाती है। सलमान खान और संजय दत्त इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।

सलमान खान का नाम अक्सर महिलाओं से बदतमीजी के लिए भी बदनाम रहा है। उनकी अधिकतर पूर्व प्रेमिकाओं ने उन पर गाली-गलौज और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाये हैं। ऐश्वर्या राय के साथ उनके संबंध टूटने की वजह भी इसी को बताया जाता है। हीरो विवेक ओबेरॉय से उनके झगड़े की कहानी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। बीते दिनों उनके संबंध फिल्म स्टार शाहरूख खान के साथ भी बेहद खराब रहे थे। ये तो व्यावसायिकता की मांग और सलीम खान का प्रयास था जिसने दोनों को एक मंच पर साथ आने के लिए बाध्य कर दिया। वर्ना हकीकत सबको पता है।

असल में मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसी जगह है जहां ग्लैमर और दौलत हर ओर बिखरा पड़ा है। इसी चकाचौंध से खिंचे हुए हजारों लोग यहां हर दिन चले आते हैं। जब आम लोगों के सिर पर इस इंडस्ट्री का इतना जादू चलता है तो जो बच्चे यहां आंखें खोलते हैं उन पर इसका कितना असर होता होगा ये कहने की बात ही नहीं है। जिनकी सुबह पेरिस में और रात लंदन में बीततीं हो उन लोगों से दूसरे के दर्द को समझने की अपेक्षा करना ही बेमानी है। सलमान खान उसी माहौल में पले-बढ़े वो बच्चे हैं जिनका बिगड़ैल मूड ही उनका यूएसपी है। उनसे किसी बलात्कार पीड़िता के दर्द को समझने की संवेदनशीलता की उम्मीद करना ही बेमानी है।

बीइंग ह्यूमन संस्था के नाम पर अपनी बिगड़ी छवि सुधारने के प्रयास में लगे सलमान खुद कितने ह्यूमन हैं ये बात वो बार-बार साबित करते हैं। लेकिन, यहां सवाल उनके इस कुकृत्य पर पर्दा डालने के उस कुत्सित प्रयास का है जो फिल्म इंडस्ट्री के उनके साथी कलाकारों के साथ-साथ उनके घरवाले भी कर रहे हैं।

शोले फिल्म के मशहूर डायलॉग राइटर सलीम खान से कम-से-कम ये उम्मीद तो नहीं की जा सकती कि वो अपने बेटे का बचाव उस भद्दे माफीनामा से करते जो उन्होंने किया। भाई अरबाज खान के बयान ने तो सलमान खान के बयान को भी पीछे छोड़ दिया। अरबाज ने कहा कि सलमान को जब गलती महसूस होगी तो खुद माफी मांग लेंगे गोया सही-गलत का फैसला सलमान खान के मूड से तय होगा। इन दोनों से एक कदम आगे बढ़ते हुए मशहूर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने 52 साल के सलमान खान को बच्चा तक कह डाला। वहीं अन्य कलाकारों ने मामले में मुंह तक खोलना उचित नहीं समझा।

माना कि फिल्म इंडस्ट्री में लोग ना तो खुलकर दोस्ती करते हैं और ना खुलकर दुश्मनी ही निभाते हैं। लेकिन, क्या वहां गलत को गलत भी नहीं कहते? सामाजिक सरोकार की फिल्में बनाने और सामाजिक बुराईयों को उठाने की बात कहने वाले ये कैसे कलाकार हैं जिनमें सच बोलने का माद्दा तक नहीं है? क्या संवेदनाओं की नदियां फिल्म इंडस्ट्री में सूख चुकी है? अगर ऐसा है तो ये कला का घोर अपमान है। संवेदनहीन व्यक्ति ना तो अच्छा कलाकार साबित हो सकता है और ना ही बेहतर इंसान बन सकता है। ये वक्त सलमान खान के बहाने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को खुद के अंदर झांकने का है। शायद इसी बहाने कलाकारों की बची-खुची संवेदना बाहर निकल सके। वर्ना यहां तो सिर्फ व्यावसायिकता ही व्यावसायिकता नजर आ रही है।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

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