तामझाम में कहां है योग ?

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World Yoga Day
World Yoga Day

विश्व योग दिवस के मौके पर पूरे देश में इसे मनाने की तैयारियां बड़े जोरशोर से की गई हैं। विद्यालय, विश्वविद्यालय, कार्यालयों और पार्कों में भी लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है। बढ़-चढ़कर लोग इस मौके पर अपना योगदान दे रहे हैं। एक प्रकार से देखें तो दूसरे विश्व योग दिवस के मौके पर योग एक बड़े उद्योग में बदल गया है। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए हम ये कह सकते हैं कि आज योग ने एक बड़े बाजार को खड़ा कर दिया है। देश में योग से जुड़े उत्पादों का बाजार 120 अरब तक पहुंच चुका है। पिछले साल की तुलना में आज योग इंडस्ट्री में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि योग ट्रेनरों की संख्या 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वहीं देश में अब योग करने वालों की संख्या 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। देश में योग इंडस्ट्री 2.5 लाख करोड़ पार कर चुकी है। आने वाले कुछ सालों में पूरी दुनिया में योग इंडस्ट्री 5 लाख करोड़ तक पार कर जायेगी।

महज भारत में ही पिछले आठ सालों में योग का कारोबार 45 फीसदी से बढ़कर ढाई लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। पूरी दुनिया में करीब 20 करोड़ लोग योग करते हैं जिनमें आधी संख्या भारतीयों की है। योग की बढ़ती मांग देखते हुए इसे कैरियर के रूप में अपनाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। विदेशों से भी लोग इस विषय की पढ़ाई करने भारत आ रहे हैं। विदेशी ट्रेनरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार अब योग कोर्स के लिए आनेवालों के लिए अलग से वीजा देने की भी योजना बना रही है। इतना ही नहीं, योग की वजह से इससे जुड़े अन्य उत्पादों की मार्केट वैल्यू भी बढ़ी है। योग मैट और ड्रेस की मांग तेजी से बढ़ रही है। कुल मिलाकर योग ने एक ऐसे बड़े व्यापार का रूप ले लिया है जो आनेवाले समय में और भी बढ़ेगा।

योग का ये अंतर्राष्ट्रीय महत्व प्रभावित तो करता है। लेकिन, इसके साथ ही कई सवाल भी पैदा करता है। पूरे देश में योग के आयोजन के नाम पर सरकार से लाखों का फंड लिया जा रहा है। इस फंड का कैसे उपयोग किया जा रहा है इसे देखने वाला कौन है? इन मानकों का किसी ने क्या ख्याल रखा है?

सच तो ये है कि आज के दौर में योग स्टेट्स सिंबल बन चुका है। फिल्म इंडस्ट्री के ग्लैमर ने योग को एक नये रुप में पेश किया है। इससे जितना फायदा योग को हुआ है उससे ज्यादा नुकसान भी इसी को हुआ है। आज के दौर में योग को लोगों ने आसन समझ लिया है। वो समझते हैं कुछ आसनों को कर वो सारे रोगों से मुक्ति पा लेंगे। जबकि, वास्तव में ऐसा नहीं है। योग रोगों को होने से रोकता तो है। लेकिन, असाध्य बीमारियों को ठीक नहीं करता।

वास्तव में योग एक संपूर्ण जीवनशैली है जिसे अपनाकर ही स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन को प्राप्त किया जा सकता है। योग सिर्फ आसनों तक ही सीमित नहीं है। ये आचार-व्यवहार की पवित्रता के साथ-साथ प्राणायाम की विधियों के द्वारा मन के विकारों को भी दूर करता है। योग के द्वारा एक ऐसी अवस्था भी आती है जब व्यक्ति ईश्वर से संबंध स्थापित कर लेता है। वास्तव में योग संपूर्ण जीवन पद्धति है। इसके द्वारा जीवन जीने की कला, सिद्धांत, लक्ष्य, जीवन की मूल अवस्था, मूल प्रवृत्तियों का ज्ञान व्यक्ति को दिया जाता है। लेकिन, वर्तमान तामझाम में योग का ये व्यापक रूप नजर नहीं आता जो बेहद चिंता का विषय है।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

 

 

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