ये शाम फिर न आएगी

0
518
An Evening at Ganga Ghat, Patna
An Evening at Ganga Ghat, Patna

पटना के एन.आई.टी. घाट से लेकर गायघाट तक जबसे नीतीश सरकार ने मरीन ड्राइव बनाने की घोषणा की है, तबसे लोगों की चहल-पहल यहां बढ़ गई है। शाम ढलते ही गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। बेशक इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। पर, परिवार के साथ आये बच्चों और अधेड़ों की भी यहां कोई कमी नहीं है। उमस भरी गर्मी में ठंढ़क की राहत पाने के लिए शाम को निकले लोगों की इस भीड़ में कुछ भी असामान्य नहीं है। ऐसे नजारे अक्सर बड़े शहरों में देखने को मिलते हैं। लेकिन पटना जैसे छोटे शहर में ये दृश्य थोड़ा अलग जरूर दिखता है।

दरअसल, ये बदलते पटना की तस्वीर है, जहां लोग अब जी रहे हैं। अपने जीवन के हरेक क्षण का मजा लेना सीख रहे हैं। ये बदलाव भले ही बहुत साधारण नजर आये। लेकिन इसके पीछे सामाजिक ढांचे में जो परिवर्तन हुआ है वो बहुत असाधारण है। कस्बाई मानसिकता में पले-बढ़े पटनावासी कुछ सालों पहले ज्यादा-से-ज्यादा संपत्ति अर्जित कर अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना ही अपना धर्म समझते थे। लेकिन आज पटना के लोगों की सोच बदल गई है। अब वो जीना सीख रहे हैं। मेट्रो शहरों से लौट कर घर आये लोग इसकी बड़ी वजह हैं। जो लोग बाहर निकले उन्होंने अलग-अलग संस्कृतियों के बीच अपना समय गुजारा। बड़े शहरों के लोगों की मानसिकता और खुले माहौल ने उन्हें प्रभावित किया और घर लौटने के बाद उन्होंने सूबे में इसी तरह के वातावरण की वकालत की। शुरू-शुरू में परंपरावादी लोगों ने इसका विरोध किया। लेकिन बाद में हर बदलाव की तरह इसे भी स्वीकार कर लिया गया।

मानसिकता में आये इस परिवर्तन की एक वजह लोगों की आर्थिक स्थिति में आया बदलाव भी है। पहले धन जहां कुछ लोगों की पहुंच तक ही संभव था। वहीं अब रुपये ने आम आदमी की जिंदगी में भी अपनी जगह बनाई है। कई बड़ी कंपनियों के पटना आने से राज्य में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। जिसकी वजह से होनहार युवाओं को बेहतर मौके प्राप्त हुए हैं। शहर में काम-काज का माहौल भी तेजी से बदला है। लोग प्रोफेशनल होने लगे हैं और पर्यटन के महत्व को समझने भी लगे हैं।

यूं भी अतीत में झाकें तो पटना की भव्यता कभी ग्रीक सत्ता को भी चुनौती देती थी। उस वक्त यहां के लोगों का रहन-सहन संसार भर में सबसे उच्च था। कालांतर में लोगों की सोच सीमित होकर रह गई। लेकिन, अब पटना ने एक बार फिर करवट ली है।

अब देर शाम तक शहर में घूमना आवारापंथी नहीं बल्कि शौक का पर्याय बन चुका है। पटना फिर से जीवंत होने लगा है। गंगा घाटों पर देर रात लोगों का जमघट इस जीवतंता को बयां कर रहा है। ये प्राचीन शहर अपने पुराने स्वरूप को धीरे-धीरे पा रहा है। शहर की आबो-हवा बदल रही है। ये बेफिक्री शहर की बदली रंगत को बयां कर रही है। पटनावासी अब फिर से जीने की कला सीख रहे हैं। तो आईये हम भी थोड़ा सा जी लें और आज की शाम गंगा घाट पर बैठकर गंगा की धारा को देखते हुए बितायें।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

Comments

comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here