माना मुर्गी बराबर मोदी की दाल, अब लालू बताएं बिहार का हाल

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Lalu Prasad Yadav
Lalu Prasad Yadav

नरेन्द्र मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कल ट्विटर पर आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने केन्द्र सरकार को सभी मोर्चों पर फेल बताया और कहा कि 30 साल बाद प्रचंड बहुमत से केन्द्र में आई सरकार की अभी तक कोई उपलब्धि नहीं है। अपने खास अंदाज में उन्होंने कहा कि दालें मुर्गी के बराबर महंगी हो गईं पर महंगाई रत्ती भर कम नहीं हुई। मोदी सरकार विकास नहीं, विनाश कर रही है।

आरजेडी सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बारहों मास चुनावी मोड में नजर आते हैं। पैसे के बल पर मोदी-मोदी का मंत्रोच्चार कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पहली बार प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने अपनी जाति बताई और चाय बेचने के ‘प्रपंच’ को भुनाया। लालू ने केन्द्र सरकार को बेबस और लाचार बताते हुए कहा कि पहले गरीबों की उम्मीदें जगाई गईं, दो करोड़ लोगों को नौकरी देने की बात कही गई, सौ दिन में काला धन वापस लाने और 15-15 लाख रुपये देने का सपना दिखाया गया और अब उन्हीं गरीबों की मेहनत के पैसे बाहर भेजे जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री बोलते हैं कि हम क्या करें..?

लालू ने आरोप लगाया कि दल, बल और छल के साथ पूरी सरकार छात्र राजनीति में कूद गई है। यही नहीं उन्होंने आरएसएस की विचारधारा शिक्षण-संस्थानों पर थोपे जाने की बात भी कही और आरोप लगाया कि अब तो बात-बात पर देशद्रोह के प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं।

लालू ने सरकार पर किसान विरोधी होने का भी आरोप लगाया और कहा कि विदेशी पूंजीपतियों के लिए रेड कारपेट बिछाया जा रहा लेकिन देश के किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार उनके लिए बिजली, पानी, बीज और खाद की व्यवस्था भी नहीं कर पा रही है।

लब्बोलुआब ये कि लालू ने केन्द्र की कमियां बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर कमियां हैं तो बताई जानी ही चाहिएं। लेकिन यहाँ एक बात सहज रूप से मन में आती है कि क्या कोई भी और कहीं की भी सरकार ऐसी हो सकती है जिसमें केवल कमियां ही कमियां हों और जनता आँख मूंदें बैठी रहे..? बैठी ही ना रहे बल्कि वोट भी देती रहे..? कम-से-कम लालू की बातों से तो यही लगता है, क्योंकि उन्हें दो साल में केन्द्र का कोई अच्छा काम दिखा ही नहीं।

आलोचना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है, बशर्ते कि वो विवेकसम्मत हो। विरोधी सरकारों की आलोचना मोदी भी करते हैं लेकिन वो भी मोदी ही थे जिन्होंने कुछ दिनों पहले बिहार के विद्युतीकरण को लेकर नीतीश और उनकी सरकार की तारीफ की थी। खैर, लालू केन्द्र के किसी काम से संतुष्ट नहीं तो ना सही लेकिन क्या वो बिहार सरकार के सारे काम से संतुष्ट हैं..? क्या वो ये नहीं देख पा रहे कि राज्य में असामाजिक तत्व एक बार फिर सिर उठाने लगे हैं..? अपराधियों का बढ़ता मनोबल क्या गिरती कानून-व्यवस्था की निशानी नहीं..?

अगर लालू “निन्दक नियरे राखिए…” पर ही अमल करना चाहते हैं तो करें लेकिन फिर शुरुआत अपने घर से करें। जिस सरकार के वो ‘अभिभावक’ हैं, जिस दिन उस पर उनकी उँगली उठ जाय उस दिन वो किसी पर भी उँगली उठाने के हकदार होंगे।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप     

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