राष्ट्रपिता के देश में ‘अनाथ’ है उनकी अपनी ही पीढ़ी

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Kanu Gandhi
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कभी महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की गोद में खेले उनके सबसे प्रिय पोते कनु रामदास गांधी आज वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं। राष्ट्रपिता के देश में उनकी अपनी ही पीढ़ी ‘अनाथ’ है। जी हाँ, गांधीजी के पोते पिछले एक सप्ताह से अपनी पत्नी सहित दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर स्थित गुरु विश्राम वृद्धाश्रम में रह रहे हैं और गांधीजी के बताए रास्ते पर चलने वाले देश में कोई उधर का रास्ता नहीं कर रहा। पहले गुजरात और अब दिल्ली की सरकार, केन्द्र सरकार या पिछली तीन पीढ़ियों से ‘गांधी’ उपनाम इस्तेमाल करने वाला परिवार और उस परिवार की पार्टी – उनकी इस स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा या लेगा भी कि नहीं..?

बहरहाल, एमआईटी से शिक्षा प्राप्त कर नासा में काम कर चुके कनु गांधी इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहराते और ना ही गुजरात छोड़कर यहाँ आने का कारण खुलकर बताते हैं। लेकिन यह जरूर कहते हैं कि वो किसी के आगे मदद के लिए हाथ नहीं फैला सकते। सरल स्वभाव के वयोवृद्ध कनु कहते हैं कि “मेरी गलती है कि मैं भीख मांगने से शर्माता हूँ। प्रधानमंत्री वर्धा के सेवाश्रम गए थे, मैंने उन्हें घूम-घूम कर वहाँ के हालात दिखाए थे, उन्होंने मुझसे कहा था कि आप जब चाहें मेरे पास आ सकते हैं, आपके लिए कुछ करूँगा, लेकिन मैं नहीं गया, क्योंकि मुझे हाथ फैलाना पसंद नहीं।”

महात्मा गांधी के बेटे रामदास के बेटे कनु 20 साल की उम्र में गांधीजी की मदद करने सेवाग्राम चले गए थे। बाद के दिनों में वो नासा गए। 40 साल अमेरिका में रहकर भारत लौटे कनु आज अपने नासा में बीते दिनों को याद कर भावुक हो उठते हैं। वो कहते हैं कि “मैं याद करता हूँ कि मैंने कैसे काम किया था और आज यह क्या हो गया। मैं अपनी पत्नी की हालत देखता हूँ तो रो पड़ता हूँ।”

कनु गांधी के वृद्धाश्रम आने के बाद से यहाँ ‘आम’ लोगों का आना बढ़ गया है लेकिन किसी ‘खास’ के पैर यहाँ नहीं पड़े। वृद्धाश्रम के मालिक विश्राम मानव बिल्कुल सही कहते हैं कि “यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है कि गांधीजी के पोते इस हाल में हैं। मुझे लगता है कि नेताओं से ज्यादा आम लोगों को उनकी कद्र है और वह उनसे मिलने आते हैं।“ ऐसे में कनु गांधी की पत्नी अपना दर्द भला कैसे छिपाएं..? वो यह कहने से खुद को नहीं रोक पातीं कि जिस देश की कल्पना लेकर वापस आए थे, देश वैसा नहीं है।

बहरहाल देखते हैं कि महात्मा गांधी के नाम के बिना जिन नेताओं के भाषण पूरे नहीं होते वे कनु गांधी के लिए कब और क्या करते हैं..! कनु गांधी, जिन्हें हाथ फैलाना पसंद नहीं पर चाहते हैं कि लोग उनकी इस प्रकार से मदद करें कि (उम्र के इस पड़ाव पर भी) उनकी ‘मजबूती’ का इस्तेमाल हो।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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