सिविल सेवा में बिहार की हिस्सेदारी कम पर मैथिली ने लहराया परचम

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UPSC Result 2016
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में इस साल बिहार से 77 अभ्यर्थी सफल हुए हैं जबकि पिछले साल यहाँ से 88 अभ्यर्थी सफल हुए थे। इस बार सबसे अधिक 120 अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश से सफलता पाई है। पिछली बार यहाँ से 91 अभ्यर्थी सफल हुए थे। बाकी राज्यों से तुलना करें तो इस साल तमिलनाडु का रिजल्ट भी बिहार से बेहतर रहा है। यहाँ से इस साल 90 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। हाँ, बिहार के लिए एक अच्छी ख़बर ये जरूर रही कि टॉप टेन में इस बार यहाँ के दो अभ्यर्थी हैं। पिछली बार केवल एक अभ्यर्थी ने टॉप टेन में जगह बनाई थी।

सिविल सेवा के नतीजों में इस साल दिल्ली की 22 वर्षीया टीना डाबी ने सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। जम्मू-कश्मीर के अतहर आमिर उल शफी खान दूसरे स्थान पर रहे और दिल्ली के ही जसमीत सिंह संधू ने तीसरा स्थान हासिल किया। बता दें कि इस बार सिविल सेवा के लिए कुल 1078 लोग चुने गए जिनमें 499 सामान्य श्रेणी के, 314 ओबीसी कोटे के, 176 अनुसूचित जाति कोटे के और 89 अनुसूचित जनजाति कोटे के हैं। वहीं 172 अभ्यर्थी प्रतीक्षा सूची में हैं।

अब बात बिहार की। बिहार से इस साल पटना के अनुपम शुक्ला ने 10वां स्थान हासिल किया है। 2013 में अनुपम का चयन भारतीय वन सेवा के लिए हुआ था। बिहार के अन्य सफल अभ्यर्थियों में पटना के ही कुमार आशीर्वाद को 35वां, रवि प्रकाश को 54वां, औरंगाबाद के विवेक कुमार को 80वां, दरभंगा के सौरभ को 142वां, अंजनी अंजन को 148वां और सहरसा के ऋषभ को 162वां स्थान मिला है। उल्लेखनीय है कि अपने पहले ही प्रयास में 162वां स्थान पाने वाले ऋषभ ने ऐच्छिक विषय के रूप में मैथिली को चुना था।

पिछले साल की तुलना में इस साल सिविल सेवा में बिहार की हिस्सेदारी भले ही कम हुई हो लेकिन मैथिली के लिए इस बार के नतीजों से नई उम्मीद जगी है। मैथिली विषय से इस बार 18 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इन अभ्यर्थियों में सहरसा के ऋषभ (162वां स्थान), सुपौल के संतोष (692वां स्थान) और मधेपुरा के आदित्य (863वां स्थान) कोसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अन्य सफल अभ्यर्थियों में अंजनी कुमार झा (165वां स्थान), रौशन कुमार (352वां स्थान), सोनम कुमार (626वां स्थान), कुमार गौरव (831वां स्थान) तथा पहली बार चुनी गई महिला अभ्यर्थी रजनी झा (591वां स्थान) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के अमित कुमार आनंद ने भी मैथिली को विषय बनाया था। उन्हें 763वां स्थान मिला है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सिविल सेवा के लिए इस साल 4.36 लाख अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा दी थी, 15008 मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए थे और 2914 को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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