अगस्ता वेस्टलैंड का ‘भूत’ और अरविन्द केजरीवाल

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Arvind Kejriwal
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राजनीति करने वाले स्वयं को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए क्या-क्या नहीं करते..! कई बार तो वे उस लड़ाई में भी कूद पड़ते हैं जिसमें उनकी जगह ही नहीं बन रही होती और ऐसा करने में अरविन्द केजरीवाल को महारत हासिल है। अब अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे पर उनका कल का ही ट्वीट लीजिए। इस ट्वीट में उन्होंने कहा है कि “गांधी परिवार के पास मोदीजी के कुछ राज हैं। इसलिए मोदीजी कभी गांधी परिवार के खिलाफ कदम नहीं उठाते।” शायद केजरीवालजी ने सोचा हो कि क्यों ना कुछ ऐसा कहा जाय कि कांग्रेस और भाजपा दोनों लपेटे में आ जाय और सुर्खियां वो खुद बटोर ले जाएं।

इससे पहले अरविन्द केजरीवाल अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए सोनिया को गिरफ्तार करने की चुनौती प्रधानमंत्री मोदी को दे चुके हैं। उनकी पार्टी (आप) ने बीते शनिवार को सोनिया गांधी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।

बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के शासनकाल में खरीदे गए थे और पिछले महीने इस सौदे पर इटली की एक अदालत के फैसले में सोनिया गांधी का नाम आया था। जिसके बाद से वो निशाने पर हैं। हालांकि संसद में इस हेलीकॉप्टर घोटाले पर कांग्रेस ने कहा है कि टेंडर के मापदंड में जो बदलाव किए गए थे वो भाजपा की अटल बिहारी सरकार के समय हुए थे।

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड से वर्ष 1999 में 12 हेलीकॉप्टर खरीदने की बात शुरू हुई थी और विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद 2005 में ये सौदा हुआ था। लेकिन 2012 में जब इस सौदे में रिश्वत दिए जाने की ख़बर आई तो तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने माना कि ऐसा हुआ है और इसकी जांच सीबीआई और ईडी को सौंप दी।

बहरहाल, समय के साथ सत्य सामने आ ही जाएगा। लेकिन क्या केजरीवाल ये बताने का कष्ट करेंगे कि मोदीजी के तथाकथित ‘राज’ के बारे में ऐसी कौन सी ‘आकाशवाणी’ हुई जो पूरे देश में केवल उन्होंने सुनी और अब उसे ‘नि:शुल्क’ प्रसारित कर रहे हैं..? और अगर उनके पास ऐसा कहने को पर्याप्त ‘तथ्य’ हैं तो उसे सामने लाने से उन्हें रोका किसने है..? वैसे यहाँ ‘पार्टी विद डिफरेंस’ के नारे के साथ दिल्ली की कुर्सी पर बैठे केजरीवालजी से ये पूछना भी बनता है कि शीला दीक्षित के खिलाफ आरोप का जो ‘पुलिंदा’ लिए वो घूम रहे थे, सत्तासीन होने के साथ वो कहाँ चला गया..?

सच यह है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री आदत से मजबूर हैं या सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा करते हैं, पर कई बार वो कुछ ऐसा बोल या कर जाते हैं जिसके निहित अर्थ और गंभीरता को वो या तो समझते ही नहीं या फिर तब समझते हैं जब देर हो चुकी होती है। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का, चाहे वो कोई भी हो, ‘यूँ ही’ कुछ बोल जाना निहायत आपत्तिजनक है।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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