तेजस्वी से ‘भूल’ सुधारने को कब कहेंगे लालू..?

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Lalu Prasad with son Tejaswi
Lalu Prasad with son Tejaswi

एक विज्ञापन ने ना केवल बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है बल्कि विपक्ष को इससे यहाँ की महागठबंधन सरकार पर तंज कसने का बड़ा मौका भी मिल गया है। जी हाँ, बिहार में एक सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित सरकारी विज्ञापन से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही गायब हैं। सरैया-मोतीपुर सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित पूरे पेज वाले इस विज्ञापन में तेजस्वी की बड़ी-सी तस्वीर छपी है जबकि नीतीश इससे नदारद हैं। बता दें कि इस विभाग के मंत्री लालू के सुपुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव हैं।

केन्द्र या राज्य के किसी विभाग का विज्ञापन हो और उसमें विभागीय मंत्री के साथ प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की तस्वीर ना हो, अमूमन ऐसा नहीं होता। परम्परा के साथ-साथ शिष्टाचार का तकाजा भी यही है कि ऐसे विज्ञापनों में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की मौजूदगी हो। काम चाहे किसी विभागविशेष का ही क्यों ना हो माना यही जाता है कि उस विभाग के मंत्री प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर वो काम कर रहे हैं। ऐसे में ये मर्यादा से कहीं आगे लगभग बाध्यता है या होनी चाहिए कि उस विभाग के विज्ञापन या प्रचार-प्रसार में सरकार के मुखिया की तस्वीर हो। पर बिहार में ऐसा नहीं हो रहा।

राजनीति से अलग हटकर बात करें तो भी जो हुआ उसे हजम करना मुश्किल है। ये ऐसी ‘भूल’ है जो किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए थी। बात विभागीय या सरकारी मर्यादा की हो, नीतीश के पद और अनुभव की वरिष्ठता की हो या फिर गठबंधन धर्म की, तेजस्वी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अब भला भाजपा इस मौके को भुनाने से पीछे क्यों रहती ! भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व में इसी विभाग के मंत्री रहे नंद किशोर यादव ने बिना देर किए पूछ ही लिया कि क्या सरकार ने नई विज्ञापन नीति अपना ली है ?  साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को भी कह डाला।

बहरहाल, ऐसा चाहे जिस भी ‘कारण’ से हुआ हो, पूरे प्रकरण में अनुभवी लालू की चुप्पी समझ के परे है। वो ना केवल तेजस्वी के पिता हैं बल्कि महागठबंधन सरकार के ‘अभिवावक’ की भूमिका में भी हैं। उन्हें हर हाल में ये समझना और तेजस्वी को समझाना होगा कि बिहार और सरकार की स्थिरता के लिए ‘महत्वाकांक्षा’ का असमय, अभद्र और अस्वस्थ प्रदर्शन ना हो। ये देखना सचमुच दिलचस्प होगा कि लालू स्वयं पहल कर तेजस्वी से भूल-सुधार करने को कहते हैं कि नहीं..?

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

 

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