नीतीशजी, आज ऋषि कपूर बिहार की बात करने लगे, कल आएंगे भी

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nitish kumar

बिहार में नशा पर ‘पूर्ण विराम’ लगाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़े साहस का काम किया। राज्य में जैसे एक नई ‘ऊर्जा’ का प्रवाह हो रहा हो। जिस उम्मीद पर जनता ने पाँचवीं बार नीतीश को बिहार की बागडोर सौंपी थी उसे नए ‘पंख’ मिल गए हों जैसे। खासकर महिलाएँ आँचल भर-भर दुआएं दे रही हैं। आखिर उनसे किया वादा जो निभाया उनके मुख्यमंत्री ने।

बिहार को पूर्णतया ‘ड्राई स्टेट’ बनाने का फैसला हर लिहाज से सराहनीय है, इसमें ना कोई दो राय है, ना होनी चाहिए। पर नीतीश सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर जहाँ देश-दुनिया से बधाई के संदेश आ रहे हैं वहीं कुछ लोग इसके सफल होने पर संदेह भी जता रहे हैं। ऐसे कुछ लोगों में अप्रत्याशित रूप से एक नाम ऋषि कपूर का है। बॉलीवुड के इस अभिनेता ने इस बाबत जो ट्वीट किया उसका ‘स्वर’ चाहे जो हो, पर उठाए गए सवाल मौजू और प्रासंगिक थे और उन पर विचार जरूर किया जाना चाहिए।

ऋषि कपूर ने अपने ट्वीट में इस बात पर बल दिया है कि शराबबंदी विश्व में कहीं सफल नहीं हो सकी है, जो गलत नहीं कह सकते। उन्होंने अवैध शराब को बढ़ावा मिलने की बात की है, उसे भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। और सबसे बड़ी बात ये कि इस फैसले से राज्य को तीन हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान होने की बात उन्होंने कही है, जिसकी भरपाई तो राज्य सरकार को हर हाल में करनी ही होगी।

पूर्ण शराबबंदी जैसा बड़ा निर्णय लेने से पहले ये सारी बातें नीतीश कुमार या उनकी टीम ने ना सोची हो ये मानने वाली बात नहीं। निर्णय की घड़ी में ऐसे सारे सवाल उनके सामने रहे होंगे और इनका हल भी उन्होंने सोचा होगा क्योंकि नीतीश जानते हैं कि जनता की अपेक्षा को जगाकर उन्होंने जो हासिल किया है उसे निभा कर ही वो बरकरार रख सकते हैं।

और हाँ, जहाँ तक (शराबबंदी के बाद) ऋषि कपूर के बिहार ना आने की बात है तो नीतीश ने सही कहा है कि जैसे लगता है, वे रोज बिहार आते थे। लेकिन यहाँ ये जोड़ना जरूरी है कि वे या वैसे लोग रोज बिहार तो नहीं ही आते थे, बिहार की बात तक नहीं करते थे। शराबबंदी के ऐतिहासिक फैसले के बाद वे बिहार की बात करने को बाध्य तो हो गए ना..! और आज अगर बात कर रहे हैं तो कल को बिहार आएंगे भी क्योंकि ये प्रयोग पहले बेशक कहीं सफल ना रहा हो, बिहार में जरूर होगा। संसार को ‘शून्य’ का ज्ञान देने वाला बिहार शराब से ‘शून्य’ होकर भी दिखाएगा, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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